Ticker

6/recent/ticker-posts

क्या भारत ने मौका खो दिया ? Did India Lose The Chance ? India Iran relationship

हाल में खबर(News) निकल कर आयी की चाबहार बंदर से ज़ाहेदान तक ईरान खुद से रेल लाइन बिछायेगा। हालांकि यह प्रोजेक्ट भारत को करना था ऐसी डील हुयी थी। जिससे India Iran संबंध का प्रश्न खड़ा हुआ। 

ओर एक खबर यह भी है की ईरान ने चीन के साथ 400 Billion डॉलर सौदा किया है। तो भारत में कई समाचार पत्रों , न्यूज़ चेनल ऐसी खबर दिखा रहे है की भारत ने ईरान की यह रेल प्रोजेक्ट की उत्तम मौके को खो दिया है। और अब ईरान भी चीन की तरफ हो चूका है जिससे भारत को और परेशानी होगी। 

India iran relation


कई लोग इसे भारतीय डिप्लोमैट की हार बताते है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। भारत में फैली इस गलत धारणा के सामने ईरान के विदेशी मंत्रालय ने कहा की हमने भारत को इस प्रोजेक्ट से निकला नहीं है भारत की Indian Railway Construction (IRCON) International कंपनी भविष्य में इस प्रोजेक्ट में जुड़ सकती है।

ईरान ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया लेकिन प्रश्न यह उठता है की आखिरकर ईरान खुदशे क्यों ये रेल लाइन बिछाने लगा ? और भारत को इस प्रोजेक्ट को करना था को पूरा क्यों नहीं किया ? चलिए पृष्ठभुमि (Background) के साथ समझते है। 

 पृष्ठभुमि (Background)

2003 में भारत - ईरान-अफघानिस्तान के बिच चाबहार बंदर और ज़ाहेदान तक के रेल लाइन को विकास करने की बात शरू हुई। 

लेकिन 2005 से 2013 तक ईरान पर USA के कड़े प्रतिबंध(Sanction) थे जिस वजह से बात आगे नहीं बढ़ रह थी। 2015 के पेरिस समझोते के बाद 2016 में प्रधान मंत्री मोदी की यात्रा में ईरान के साथ यह प्रोजेक्ट डील हुई। 

भारत ने 85 Mn डॉलर का निवेश किया तथा 150 Mn डॉलर का line of credit दिया है। 2018 में गेहू से भरा एक जहाज को कंडला - चाबहार से अफघानिस्तान भेजा जा चूका है। इन सब के लिए भारत ने USA  के प्रतिबंध से छूट ले ली थी। लेकिन फिर भी प्रोजेक्ट में देरी होने लगी। 

इसका कारण था की USA जल्दी से मंजूरी नहीं दे रहा था रेल लाइन बिछाने के लिए जरूरी भारी साधनो जैसे Rail mounted gantry cranes, mobile harbor crane इत्यादि में बड़ी देरी लग जाती थी।

भारत को तो USA से छूट मिली हुई थी लेकिन इस प्रोजेक्ट के सहयोगी ईरानी कंपनी  Khatab al Anbiya पर प्रतिबंध लगे हुए थे।  भारत ने ईरान को दूसरी कंपनी के साथ कोंट्राक्ट करने को बोला जिसे भी काम में और देरी हो गई। 

यह नोंधनीय बात यह भी है की अभी जो ईरान रेल लाइन बिछा रहा है वह भारत द्वारा ही दी हुई है। 


ईरान क्यों प्रोजेक्ट पूरा कर रहा है ?


1. ईरान अब इस प्रोजेक्ट को तुर्कमेनिस्तान की सिमा के साथ जोड़ कर परिवहन क्षेत्र को आगे बढ़ना चाहता है 
2. USA के प्रतिबंध के सामने टिकने के लिए ईरान अपनी आर्थिक गतिविधि को बढ़ा कर मजबूत बनना चाहता है 
3. ज़ाहेदान के बाद इस लाइन को North- South Corridor के साथ जोड़ कर ईरान विश्व Supply Chain में महत्व की भुमिका निभाना चाहता है 

north south corridor


इसीलिए इस मोके को खोने में भारत को संपूर्ण जवाबदार नहीं ठहराया जा सकता। ओर भी ऐसे बाह्य कारण थे जिसको काबू करना संभव न था। 

रही बात ईरान की चीन के साथ मित्रता की तो USA के प्रतिबंध के सामने टिकने के लिए चीन की मदद ली। यहां ये बात भी ध्यान में रखनी चाहिए की ईरान के नेता और जनता चीन को पसंद नहीं करते है। 

जब तक ईरान के पास USA  के साथ सम्बन्ध अच्छे होने की संभावना है तब तक वह चीन का मित्र बनना पसंद नहीं करेगा। यह बात इस साल के अंत में होने वाले USA के चुनाव पर निर्भर करता है। 


भारत का पक्ष (Indian angle)

ईरान ने भारत भविष्य में सहयोग कर सकता है ऐसा बताकर भारत का महत्व बताया है। ईरान जानता है की भारत ही एक ऐसा देश है जो USA के प्रतिबंधों में भी छूट ले सकता है। 

फिर भी भारत को अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव लाना जरूरी है। आसपास के देशो में बढ़ रहे चीन के रुतबे को रोकने के लिए भारत को सतर्कता से काम करना पड़ेगा।   



यदि आपको यह post Did India Lose The Chance पसंद आया या कुछ सीखने  को मिला तो कृपया इस post को Social Media ; Facebook , Twitter, Linkedin ,Pinterest पर share करे |


Post a Comment

0 Comments