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Python on Track | पाइथन ट्रैन प्रोजेक्ट क्या है ?

2 July, 2020 के दिन भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र के नागपुर और छत्तीसगढ़ के कोरबा के बिच 2.8 किलोमीटर लम्बी train चलाई|

हमारे मनमे प्रश्न उठता है अरे बापरे इतनी लम्बी train? इतनी लम्बी train क्यों चलाई ? क्या भारतीय रेल्वे का कोई project है ? ऐसा करने से कोई फायदा होता है? चलिए हम एक एक करके सारे सवालों का जवाब ढूंढते है |

क्या है पाइथन ट्रैन प्रोजेक्ट ? (What is Python Train Project)


भारतीय रेलवे के Research Design and Standards Organisation ने 2014 में मालवाहक ट्रैन पर हो रहे Overloading की समस्या को ख़तम करने के लिए यह प्रोजेक्ट चलाया

इस प्रोजेक्ट में बढ़ी संख्या में डब्बे जोड़े जाने थे | लम्बी ट्रैन जब track पर चलती है तो अजगर के समान दिखती है इसी लिए इस प्रोजेक्ट को Python नाम दिया जिसका हिंदी में मतलब अजगर होता है | कई लेखकों ने इस लम्बे अजगर को विष्णु के 'शेषनाग' के समान गिनाया |

पाइथन प्रोजेक्ट में मूलतः ट्रैन के कई इंजीनो के साथ बढ़ी संख्या में मालवाहक डब्बे (wagons) जोड़े जाते है

जैसे हम 15 December 2014 में चली प्रथम पाइथन ट्रैन की बात करे तो उसमे 
Engine की संख्या =
Wagon की संख्या = 118 
ट्रैन की लंबाई = 1.4 किलोमीटर थी

समय के साथ डब्बे की संख्या में वृद्धि की गई और 30 june 2020 में चली पाइथन ट्रैन में 177 वैगन थे | इस ट्रैन को लोगोंने 'Super Anaconda' नाम दिया जो ओडिसा के लाजकुरा और रुरकेला के बिच चली थी

लेकिन दो दिन बाद ही भारतीय रेलवे ने 
9- electric  engine और 
4 - ब्रेक वान 
236 - वैगन को खींचती हुआ 2.8 किलोमीटर लम्बा Giant Anaconda  निकाला जिसने रेलवे के  इतिहास में रिकॉर्ड स्थापित कर दिया




पाइथन ट्रेन की आवश्यकता को पड़ी?(Need for a Python Train?) 

पिछले दो दशकों से भारत में सस्ते और जडपी मालवाहक के लिए ट्रैन पर निर्भरता बढ़ती जा रही थी | 2000 के बाद मालवाहक ट्रैन पर बोज बढ़ने लगा |

माल जथ्था बढ़ता जा रहा था लेकिन रेलवे की सुविधाए सिमित थी | इस समस्या के समाधान के लिए 2004 में रेलवे ने 2 tone ज्यादा माल भरने की नीति अपनाई

ओवरलोडिंग करनेकी नीति से रेलवे को  बहुत फायदा हुआ | 'The Hindustan Times' ने  31 मई २००७ के अहेवाल में भारतीय रेलवे का 20,000 करोड़ रूपये का मुनाफा दिखाया | भारतीय रेलवे अपने इतिहास में पहली बार इतना फायदे में चली जबकि हमेशा घाटा ही जेलती रही है |

मुनाफा तो हुआ लेकिन ओवरलोडिंग से नुकशान भी हुआ | 2006 में Freight and wagon Management on Indian Railways के report  में यह पाया गया की दो वर्ष के भीतर track में facture की 3254 घटनाए बनी

स्प्रिंग और वैगन के maintanance खर्च २३% और ११% बढ़ गया | जिसने ओवरलोडिंग की निति का विकल्प ढूंढने को मजबूर किया और Python ट्रैन का आविष्कार किया

कईयों के मनमे शरू से प्रश्न है की इतने सरे इंजिन और डब्बे के बिच तालमेल कैसे होता है? चलिए इस अजगर के संचालन को भी जान लेते है


पाइथन ट्रैन का संचालन कैसे होता है? (How Python Train operated?)

तीन किलोमीटर लम्बी और 20,000 tone वजन की रेल को एक इंजिन से चलाना मुंकिन नहीं है | हालही में 2 जुलाई को चलाई गई रेल की बात करे तो उसमे 9 इंजिन जोड़े गए थे सबसे आगे एकसाथ ३ इंजिन को जोड़ा गया था| दो-दो के पैर में रेल के बिच तीन जगहों पर इंजिन जोड़े थे

इसमें इस्तमाल हुए इंजिन चितरंजन लोकोमोटिव  द्वारा बनाया WAG-5 मॉडल था | जो 4300 HorsePower और 2395 टन वजन की क्षमता रखता है


Wag 5 engine Python train
Python train WAG-5 engine


आगे लगे तीनो इंजिन खींचने का काम करते है और बीचमे लगे दो इंजिन धक्का देनेका और खीचनेका  दोनों काम करते है |

 रेल संचालन का सबसे कठिन प्रक्रिया इन सब इंजिन के बिच सामंजस्य (harmonization) स्थापित करना है |इस सामंजस्य को रेलवे की भाषा में पार्टिंग (Parting) कहते है

अगर इंजिन की गति एक समान नहीं रहती तो वैगन के जोडव में तनाव आता है और जोड़ान टूट ने का भय रहता  है | इतनी बड़ी रेल का अकस्मात बहु हानि पहोचा सकता है

इस ट्रैन का संचालन प्रशिक्षित और अनुभव वाले खास पायलट को ही दिया जाता है | ट्रैन का शरूआती Pick-up में सब इंजिन एक साथ धीरे धीरे पिक-अप देते है

सब पायलट आपसमे Woki-Toki से संपर्क में रहते है रेल के प्रथम इंजिन में रहे मुख्य पायलट के निर्देषा अनुसार सारे पायलट काम करते है और धीरे धीरे ट्रैन की speed  को 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहोचते है | हर एक सेकंड पर निर्देश को अनुसरण करना होता है जो बहुत कठिन काम है

विश्व के अन्य देश जैसे USA (अमेरिका) में लम्बी  संचालन के लिए LOCOTROL नामकी स्वयं संचालित सिस्टम का उपयोग किया जाता है | लेकिन ऐसी सिस्टम भारत के MAG -5 इंजिन में नहीं जुड़ सकती है ऐसी लिए Manually करना पड़ता है | हालाँकि इसका अपना एक फायदा है की विरोधी लोग सिस्टम को हैक करके दुर्घटना कर सकते जो manually में सुरक्षित है |

विश्व में सबसे लम्बी (Longest train) चलानेका record ऑस्ट्रेलिया के पास है | 2001 में 6000 हॉर्सपॉवर वाले 8 इंजिन को जोड़ कर 672 वैगन के साथ 7.3 किलोमीटर लम्बी ट्रैन चलाई थी जिसका रिकॉर्ड अभी तक नहीं टुटा |   

इस प्रोजेक्ट के ड्राफ्ट और रेलवे के Document को यहां से देख सकते हो

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