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आत्मसम्मान या स्वाभिमान आंदोलन क्या था इन हिंदी | Self Respect Movement by periyar in India 1925 in Hindi

 आत्मसम्मान आंदोलन क्या था ? Self-Respect Movement
| Dravida Andolan


   पहले तो हम आत्मसम्मान को व्याख्यायित करले जो मनुष्य अपने गर्व और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीता है उसे स्वाभिमान कहते है। सामान्य भाषा में एक इंसान के रूप मे खुद के लिए एक उचित सम्मान पाना।

आत्मसम्मान आंदोलन क्या है? (What is Self-Respect Movement?)

जब मनुष्य अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए आंदोलन करता है तो उसे स्वाभिमान आंदोलन कहते है। अंग्रेजी में छोटा लेकिन बहुत असरकारक शब्द है 'Fight  For Dignity'| ऐसे आंदोलन हिंसक और अहिंसक दोनों हो सकते है| 

विश्व में जब जब भेदभावपूर्ण बर्ताव है तब तब आत्मसम्मान आंदोलन चला है जैसे काले लोगो का गोरो के सामने आंदोलन चला|  वैसे ही दक्षिण एशिया के देशोंमें निम्न माने जाने वाले जातियो द्वारा उच्च जातीओ के सामने आंदोलन छेड़ा ।

विश्वमे आत्मसम्मान के लिए कई लड़ाईया हुई कुछ हिंसक और कुछ अहिंसक थी | लेकिन आज यहां पर भारत में हुए अहिंसक आत्मसम्मान आंदोलन की बात करनी है | 

प्रथम प्रश्न यह उठता है की भारत में यह आत्मसम्मान आंदोलन कब हुआ ? इस आंदोलन की भावनाये की सालो से उभरती आ रही थी लेकिन इसकी औपचारिक शरुआत 1925 में हुई| 


आत्मसम्मान आंदोलन के संथापक या नायक (self respect movement was founded by) 

भारत के दक्षिण भागमें आत्मसम्मान आंदोलन के प्रणेता(Leader) E.V. Ramaswamy Naicker थे। बाद में उसने ई .वी. रामास्वांमी जिसको पेरियार के नाम से भी जानते है उसको आमंत्रित करके आंदोलन बागडोर सोप दी थी| 

यह आंदोलन हाल के Tamilnadu और उसके आसपास के क्षेत्रो में फैला था। यह आंदोलन केवल भारत में सीमित  न रहकर तमिल आबादी वाले अन्य क्षेत्रों जेसे मलेशिया ओर सिंगापुर में भी चला था। वहाँ यह आंदोलन तमिजावेल सारँगपनी जैसे नेता और तमिल सुधार समूह द्वारा चलाय गया था।

                        Image Source www.outlookindia.com


आत्मसम्मान आंदोलन के पीछे कौन से कारण थे? (Reasons or aim of Self-Respect Movement)


यह आंदोलन निम्न माने जाने वाले जातियों के लोगोने उच्च जाति के ब्राह्मण के विरूद्ध छेड़ा था। इस आंदोलन की प्रमुख मांगे यही थी कि सभी जाती के लोगों को समान अधिकार मिले| 
यह आंदोलन में सभी व्यक्ति द्रवीडियन थे इसलिए इसे द्रविड़ आंदोलन (Dravidian Movement) भी  कहा जाता हैं।

आंदोलन का एक और पहलू यह भी था कि विदेशी भाषा से द्रवीडिन भाषा जैसेकि तमिल,तेलुगु,कन्नड़ ओर मलयालम को बचना|

समाज के कुरिवाज जैसे जाती प्रथा, वर्ण प्रथा और अस्पृश्यता को चुनोती देनी के लिए यह आंदोलन शरू हुआ। रामास्वामी मानते थे कि राजनैतिक स्वतंत्रता या प्रतिनिधित्वता ही इस सारे मुद्दों को सुलझा सकता है।

आत्मसम्मान आंदोलन में महिलाए (Women in Self Respect Movement)

इस आंदोलन में अन्नाई मिनामबल और वीराम्मल नाम की दो महिला नेता (Woman Leader) थी। जिसने पेरियार को महिला मामले, दलित महिलाओ के अधिकार, विधवा विवाह, शिक्षण आदि मुद्दों के बारे में आंदोलन चलाने का दबाव डाला।

इस आंदोलन के समय पूरे देश मे महिलाओं को बच्चे पेदा करने की स्वतंत्रता की मांग चल रही थी जिससे इस आंदोलन में भी महिला के लिए कुछ अधिकार जैसे लग्न में पात्र पसन्दगी, विवाह की आजादी, पुनः विवाह आदि की मांगे चली।

महिलाओने इस आंदोलन में सक्रीय भागीदारी दिखाई शराबबंदी, घरेलुहिंसा के पीडित की सेवा करना, देवदासी या वेश्यावृत्ति का विरोध करना जैसे काम किये|


आत्मसम्मान आंदोलन की सफलता(Achivement of Self Respect Movement)


आंदोलन तो कई मुद्दों पर था पर सफलता के तौर पर सिर्फ एक 'स्वाभिमानी विवाह' ही हाथ लगा जिसने सामाजिक बदलाव ला दिया | 

 स्वाभिमानी विवाह क्या है? (What is Self Respect Marriage?)

यह विवाह बिना कीसी ब्राह्मण या पुजारी के सम्पन्न किया जाता था जिसमे मंत्र या विधि लोगो खुद क्र लेते थे| पेरियार के मुताबित ब्राह्मण संस्कृत में मंत्र पढ़ता था जिसमें  कुछ समझ नहीं आता था और दान भी देना पड़ता था। ब्राह्मण न  होने से विवाहका खर्च भी कम हो जायेगा। 


कुछ सफलताएं 

कर्मकांडो और विवाहो से ही ब्राह्मणो का अस्तित्व चलता था आंदोलनकारी ने बिना ब्राह्मणो के यह काम करना शरू किया जिससे निम्न जाती के लोगो की मांग को और बल मिला|

विवाह के इस बदलाव में दहेज प्रथा कम हुई, आंतरज्ञातीय विवाह होने लगा,अरेंज विवाह के बदले प्रेम विवाह होने लगा।

कई स्थानों पर 'ब्राह्मण होटल' का नाम बदलकर 'शाकाहारी होटल' रखने लगे थे| म्युनिसिपल परिषद में हरिजनों के लिए जो अलग जगा थी उसको हटाकर एक साथ कर दिया |इस आंदोलन के दौरान लोको अपनी जाति बताने में गर्व  महसूस कर रहे थे |  

आत्मसम्मान आंदोलन की असफलता 

यह आंदोलन महिला और दलित समाज को स्वतंत्रता दिलाने में तथा अधिकार देनें में पुरी तरह असफल रहा | 

आंदोलन सिर्फ तमिलनाडु में सीमित रह गया राष्ट्रीय स्तरका न बन पाने की वजह से गरीब और पछात वर्ग की आर्थिक स्थिति भी न सुधार सका | 

तमिलनाडु की राजनैतिक पार्टी DMK और AIADMK का उदभव इसी आंदोलन से हुआ है।

निष्कर्ष 

आत्मसम्मान के लिए बहुत बड़ा आंदोलन था लेकिन ए सफल न हो सका।यह आत्मसम्मान आंदोलन सिर्फ तमिलनाडु के लिए नही पूरे विश्व को सामने प्रश्न छोड़ गया| 

क्या हम सभी लोगो के लिए समान अधिकारों को सुरक्षित कर पाए है? क्या राजनैतिक स्वतंत्रता संपूर्ण अधिकार दे सकती है? क्या महिला को सम्मान और समाज में समानता दिला सकती हैं ?

1925 का स्वाभिमानी आंदोलन आज भी स्वरूप बदलके चल रहा है।जैसे #Me Too movement , भारत में दलित अत्याचार, USA में रंगभेद का आंदोलन। 

भारतिय बंधारण का अनुच्छेद 21 मैं लिखा हुआ सम्मानके साथ जीने का सपना पूरा होना अभी बाकी हैं| अभी ये सपना पूरा करना भारत के युवा लोगो की जिम्मेदारी है |


अगर आप upsc और psc जैसी परीक्षा के लिए या विस्तृत जानकारी के लिए Shodhganga द्वारा प्रदर्शित Self Respect Movemen Pdf को दिए गए link से Download करके सिर्फ पढ़ाई के लिए इस्तमाल कर सकते हो | 

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