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राजकोषीय खिचाव क्या है? What is Fiscal Drag Easy Meaning in Hindi


Fiscal Drag Definition (व्याख्या)


Fiscal drag का सामान्य मतलब है अर्थव्यवस्था के विस्तारण और वस्तु की मांग पर प्रगतिशील कराधान (Progressive taxation) की नुकशान देह असर।

चलिए समझने के लिए एक सरल उदाहरण (Example) लेते है।

Explained With Example 


एक सागर नाम का व्यक्ति है जिसकी मासिक आय 1000 रूपया है। सागर की यह आय अभी कर के दायरे में नहीं आती।  मतलब अभी सागर आवक कर(Income Tax) नहीं भर रहा है। 

सरकार ने सोचा की हम पगार ज्यादा दे तो लोगो के हाथ में पैसा आएगा और वह बजार में जाकर खरीदी करेंगे। जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।

ऐसा सोच कर सागर की आय को अगले साल से 100 रुपये बढ़ा कर 1100 कर दिया। लेकिन मुश्केली यही से शरू होती है।

अब सागर की आय आवक कर के दायरे में आने लगी। यानि की अब उपरके 100 रुपये कर देना पड़ेगा। मानले की कर 10% है तो 100 *10 % के हिसाब से सागर 10 रुपये कर देगा। बचे 1090 रुपये।

देश में मुद्रास्फीति (Inflation rate)  का दर 10% है तो अगले साल रुपये का अपना मूल्य 10% घट जायेगा। तो सागर के 1090 *10% = 109

1090 -109 = 981 रुपये

मतलब की सागर की खरीद शक्ति जो 1000 थी वह पगार बढ़ाने के बाद बढ़ने की बजाए घट कर 981 रुपये हो गई। ऐसी परस्थिति को ही Fiscal Drag राजकोषीय खिचाव बोलते है।


fiscal drag upsc



सरकार ने लोगो के हाथ मे पैसा दे कर अर्थव्यवस्था मे तरळता(Liquidity) बढ़ाना चाहा लेकिन उसका उल्टा प्रभाव पड़ा ।

Note: मेने एक काल्पनिक उदाहरण से Fiscal Drag को समजाया है हो सकता है एसा वास्तव मे न हो लेकिन Concept यही रहेगा ।


राजकोषीय खिचाव तब आता है जब राष्ट्रीय आय बढ़ती है और ज्यादा लोगो को कर के दायरे मे या कर के उच्चे दायरे आ जाते है । जिससे लोगो के हाथ मे आने वाली रकम घट जाती है । जो अर्थव्यवस्था को धीमा करती है। 



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