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What is Twin Balance Sheet Syndrome Meaning in Hindi



बैलेन्स शीट क्या है ? (What is Balance sheet)


कोई भी कंपनी , संस्था या बैंक आदि अपने पूरे साल का हिसाब रखती है । यह हिसाब एक पन्ने मे आवक(Credit) और जावक(Debit) नामके दो भाग मे लिखा जाता है और अंत मे उसका Total करते है । हिसाब के इसी पन्ने को ही बैलेन्स शीट कहते है ।


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बैलेन्स शीट सिंड्रोम क्या होता है ? (What is Balance Sheet Syndrome)


सिंड्रोम शब्द पढ़ने से कोई रोग(Decease) जेसा लगता है । हा , बिलकुल इसको एक रोग मान सकते हो जो बैलेन्स शीट को होता है ।

कोई कंपनी या संस्था जो पिछले कई महीनो से अर्थव्यवस्था मे मंदी या कोई और कारण की वजह से घाटा (Loss) मे चल रही है । 

जिससे हर महीने कंपनी अपनी बैलेन्स शीट के आवक के हिस्से मे कुछ नही लिखेगा सिर्फ जावक का हिस्सा बढ़ता जाएगा । और बैलेन्स शीट के अंत मे यह घाटा दिखता रहेगा ।

कंपनी , बैंक और सरकार इस घाटे को कम करने की कोशिश करते है लेकिन घाटा कम नही होता है और एसे ही बैलेन्स शीट मे घाटा दिखता रहता है जिसे बैलेन्स शीट सिंड्रोम कहते है ।

कम शब्दो(In Short) मे कहे तो आर्थिक मंदी की वजह से कंपनी और बैंक नुकशान मे चली जाती है । जिसको कई प्रयासो के बाद भी यह मंदी उभरने नही देती ।


ट्विन बैलेन्स शीट सिंड्रोम क्या है ? (What is Twin Balance Sheet Syndrome)


जब कंपनी और कंपनी को ऋण (Loan) देने वाली बैंक दोनों मे एक साथ बैलेन्स शीट सिंड्रोम होता है तो उसे ट्विन बैलेन्स शीट सिंड्रोम (Twin Balance Sheet Syndrome) कहते है ।

यह होता केसे है और अर्थव्यवस्था को असर केसे करता है वह देखते है ।

2015 मे भारत की अर्थव्यवस्था मे ट्विन बैलेन्स शीट सिंड्रोम हुआ था तो इसको ही समजते है ।

भारत की स्टील उत्पादन कंपनीय और ऊर्जा उत्पादन कंपनियों ने भारत की सार्वजनिक बैंक (जेसे SBI, PNB, BOI आदि ) से ऋण लिया हुआ है ।

आर्थिक मंदी ने इस दोनों स्टील एवं ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी को भारी नुकशान पहोचाया जिससे वह बैंको का ब्याज, हफ्ते और मुलकीमत नही चुका पा रहे है ।

दूसरी तरफ भारतीय सार्वजनिक बैंक (Public Service Bank) का बिन सक्रिय संपति (Non Performing Asset) बढ़ गया है । बैंको के पास अब और ऋण देने के लिए पैसे नही है या तो फिर देने से डर रही है ।

घाटे की वजह से कंपनी बैंक के ऋण चुका नही पा रही है और पैसे की कमी के वजह से बैंक नया ऋण नही दे पा रहा है । मतलब की पैसा कंपनी और बैंक के बीच अटग(Blocked) गया है ।

कंपनी को उभरने के लिए ऋण चाहिए और बैंक को उभरने के लिए पैसे । इस तरह दोनों मे घाटे चलते रहते है जिसे ही ट्वीन बैलेन्स शीट सिंड्रोम कहते है ।  


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Solution 


इस सिंड्रोम से निकाल ने के लिए सरकार बैंको को पैसा देती है (Capitalization) और कंपनी के लिए कुछ राहत देती है जैसे करो में कमी करना , विदेशी रोकाण को लाना , नियमो को ढीला करना आदि। फिर भी इस सिंड्रोम से निकल ने काफी समय लग जाता है। 

  

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